जहां हर दिन चिताओं की आग जलती है, जहां जीवन की अंतिम यात्रा पूरी होती है और जहां मोक्ष की कामना लेकर देश-विदेश से लोग आते हैं—वही काशी का मणिकर्णिका घाट अब ऐतिहासिक बदलाव की ओर बढ़ रहा है। करीब 234 साल बाद इस महा श्मशान घाट की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत मणिकर्णिका घाट को हाईटेक मोक्ष धाम के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें आधुनिक सुविधाओं के साथ सनातन परंपराओं का भी पूरा सम्मान रखा जाएगा।
मणिकर्णिका घाट: जहां मृत्यु भी मोक्ष बन जाती है
काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है और मणिकर्णिका घाट को उसका हृदय। यह वही स्थान है जहां हर दिन औसतन 100 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार होता है। मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार होने से आत्मा को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। यही कारण है कि देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि नेपाल और पश्चिम बिहार तक से शव यहां लाए जाते हैं।
लेकिन अव्यवस्थाओं से भरा था मोक्ष का रास्ता
आस्था जितनी गहरी थी, परेशानियां भी उतनी ही गंभीर। संकरी गलियां, भीड़, बैठने की जगह का अभाव, शौचालयों की कमी, बारिश और बाढ़ के समय भारी अव्यवस्था—ये सब वर्षों से मणिकर्णिका घाट की सच्चाई रही है। शव लेकर आने वाले परिजन मानसिक पीड़ा के साथ-साथ शारीरिक परेशानियों से भी जूझते थे।
234 साल बाद ऐतिहासिक बदलाव
स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार मणिकर्णिका घाट का निर्माण 1771 में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था और 1791 में उन्होंने ही इसका अंतिम नवीनीकरण कराया। इसके बाद लगभग ढाई शताब्दियों तक इस घाट में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। बढ़ती आबादी और श्रद्धालुओं की संख्या के साथ अव्यवस्थाएं भी बढ़ती गईं। अब 234 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस घाट का कायाकल्प होने जा रहा है।
PM मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट
प्रधानमंत्री मोदी, जो स्वयं काशी के सांसद हैं, उन्होंने मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को एक ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में देखा है। उद्देश्य सिर्फ निर्माण नहीं, बल्कि ऐसा मोक्ष धाम बनाना है जहां श्रद्धा, सुविधा और संस्कार—तीनों का संतुलन हो।
कैसा होगा नया मणिकर्णिका घाट?
नए नक्शे के अनुसार मणिकर्णिका घाट पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा:
- दो मंजिला भवन
- 38 नए शवदाह प्लेटफॉर्म
- प्रवेश प्रांगण और चौड़ा अप्रोच मार्ग
- पंजीकरण कार्यालय
- प्रतीक्षालय और बैठने की व्यवस्था
- शुद्ध पेयजल सुविधा
- आधुनिक शौचालय
- लकड़ी ढुलाई के लिए रैंप
- दर्शन व्यू गैलरी
- आगंतुक भवन और आंगन
अब अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा, खासकर बाढ़ के दिनों में।
संस्कार भी, संरक्षण भी
पूर्व मंत्री नीलकंठ तिवारी के अनुसार इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें घाट पर मौजूद प्राचीन मूर्तियों, मंदिरों और धार्मिक संरचनाओं को पूरी तरह संरक्षित किया जाएगा। नवीनीकरण आधुनिक होगा, लेकिन आत्मा पूरी तरह सनातन रहेगी।
स्थानीय लोगों की उम्मीदें
स्थानीय निवासी अभिषेक शर्मा कहते हैं, हमने कभी नहीं सोचा था कि मणिकर्णिका घाट इतना बदलेगा। यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई, लेकिन सुविधाएं नहीं। अब जो हो रहा है, वह ऐतिहासिक है।
बाढ़ में भी नहीं रुकेगा मोक्ष का मार्ग
गंगा में बाढ़ के समय शवदाह में आने वाली परेशानियों को भी ध्यान में रखा गया है। नए डिजाइन में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में भी अंतिम संस्कार बिना बाधा के हो सकेगा।
आस्था, आधुनिकता और सम्मान का संगम
मणिकर्णिका घाट का यह पुनर्विकास सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि मृत्यु जैसे संवेदनशील विषय को सम्मान, सुविधा और गरिमा देने की पहल है। जहां जीवन समाप्त होता है, वहां व्यवस्था की शुरुआत हो—यही इस परियोजना की आत्मा है।