बरेली में सोशल मीडिया के जरिए नफरत और फर्जी खबरें फैलाकर साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने की साजिश का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। ‘हैदरी दल’ नाम से चल रहे सोशल मीडिया नेटवर्क के मास्टरमाइंड को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर आरोप है कि वह इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भड़काऊ पोस्ट और एडिटेड वीडियो डालकर दो समुदायों के बीच तनाव पैदा कर रहा था। पुलिस के अनुसार उसकी गतिविधियों से सामाजिक सौहार्द को गंभीर खतरा पैदा हो रहा था।
सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाला नेटवर्क बेनकाब
बरेली में सोशल मीडिया के जरिए साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश करने वाले एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए कोतवाली पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। ‘हैदरी दल’ नाम से संचालित हो रहे सोशल मीडिया अकाउंट्स के मास्टरमाइंड को पुलिस ने पुराना रोडवेज बस स्टैंड के पास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान मोहम्मद मजहर अंसारी के रूप में हुई है, जो लंबे समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग कर रहा था।
फर्जी खबरों से भड़काने की साजिश
कोतवाली इंस्पेक्टर सुरेश गौतम के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया पर जानबूझकर आपत्तिजनक, भड़काऊ और गुमराह करने वाली सामग्री पोस्ट करता था। उसका मकसद धार्मिक भावनाओं को भड़काकर समाज में तनाव और अविश्वास का माहौल पैदा करना था। आरोपी अलग-अलग जगहों की पुरानी या असंबंधित घटनाओं के वीडियो उठाकर उन्हें एडिट करता और उन्हें बरेली या अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की घटना बताकर वायरल करता था।
पहले भी दर्ज हो चुके हैं मुकदमे
यह पहली बार नहीं है जब ‘Haidari Dal Bareilly’ नाम से जुड़े अकाउंट्स पुलिस के रडार पर आए हों। इससे पहले भी कोतवाली थाने में इन अकाउंट्स के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस की कार्रवाई के बाद इन अकाउंट्स को बंद करा दिया गया था, लेकिन आरोपी ने नए नामों और नए प्रोफाइल्स के जरिए फिर से गतिविधियां शुरू कर दीं।
साइबर सेल और सर्विलांस की मदद से ट्रेस
एसएसपी अनुराग आर्य के निर्देश पर कोतवाली पुलिस और साइबर सेल ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। तकनीकी सर्विलांस के जरिए यह पता लगाया गया कि इन सोशल मीडिया अकाउंट्स का संचालन झारखंड के गिरीडीह जिले से किया जा रहा था। लोकेशन कन्फर्म होने के बाद पुलिस टीम ने आरोपी को ट्रेस कर बरेली लाया और गिरफ्तारी की।
पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह अलग-अलग शहरों में रेस्टोरेंट में काम करता रहा है। इसी दौरान उसने सोशल मीडिया को अपनी पहचान और कमाई का जरिया बनाया। अधिक फॉलोअर्स पाने और वायरल होने की होड़ में उसने भड़काऊ कंटेंट का सहारा लिया। आरोपी इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर कई अकाउंट और चैनल चला रहा था।
हजारों फॉलोअर्स, तेजी से वायरल होता था कंटेंट
पुलिस के मुताबिक कुछ अकाउंट्स पर हजारों और कुछ पर 30 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स थे। यही वजह थी कि आरोपी द्वारा पोस्ट की गई फर्जी और भड़काऊ सामग्री कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच जाती थी। यह सोशल मीडिया की ताकत का गलत इस्तेमाल था, जिससे कानून-व्यवस्था को सीधा खतरा पैदा हो रहा था।
मोबाइल बरामद, डिजिटल सबूत जांच में
पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया है, जिससे सभी सोशल मीडिया अकाउंट संचालित किए जा रहे थे। मोबाइल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस को उम्मीद है कि जांच में और भी अकाउंट्स, नेटवर्क से जुड़े लोग और डिजिटल सबूत सामने आ सकते हैं।
प्रशासन का सख्त संदेश
पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने और साम्प्रदायिक माहौल खराब करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। ऐसे तत्व जो समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आम लोगों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी भड़काऊ पोस्ट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचें।
सोशल मीडिया यूजर्स के लिए चेतावनी
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सोशल मीडिया जहां सूचना का माध्यम है, वहीं उसका गलत इस्तेमाल समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। पुलिस का कहना है कि आने वाले समय में ऐसे मामलों पर और कड़ी नजर रखी जाएगी और साइबर पेट्रोलिंग को और मजबूत किया जाएगा।