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उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के हसनगंज तहसील क्षेत्र से एक रहस्यमयी और आस्था से जुड़ा मामला सामने आया है। यहां एक युवक के लगातार सपनों में खाटू श्याम के आने और ज़मीन के नीचे दबे होने का संकेत देने के बाद जब पीपल के पेड़ के नीचे खुदाई कराई गई, तो वहां से एक मूर्ति निकलने का दावा किया गया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौके पर पहुंच रहे हैं।

उन्नाव में जमीन के नीचे मिली खाटू श्याम की मूर्ति, युवक के सपने से जुड़ा है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के हसनगंज तहसील क्षेत्र के बीचपरी गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा और बहस को जन्म दे दिया है। गांव में एक पीपल के पेड़ के नीचे खुदाई के दौरान खाटू श्याम की मूर्ति मिलने का दावा किया गया है। खास बात यह है कि इस खुदाई की शुरुआत एक युवक के सपनों के आधार पर की गई थी।

शांत गांव बना आस्था का केंद्र

बीचपरी गांव सामान्य दिनों में एक शांत ग्रामीण इलाका है, लेकिन जैसे ही मूर्ति मिलने की खबर फैली, गांव में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगे। लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं और खाटू श्याम की कृपा बता रहे हैं।

युवक के सपनों ने खोला रहस्य?

इस पूरे मामले का केंद्र 25 वर्षीय अमरपाल है, जो गांव निवासी मनोहर लाल का बेटा है। अमरपाल वर्तमान में इटावा में रहकर बी-फार्मा की पढ़ाई कर रहा है। अमरपाल ने बताया कि उसे बीते कई महीनों से लगातार सपनों में खाटू श्याम दिखाई दे रहे थे। अमरपाल के अनुसार, सपनों में खाटू श्याम उसे बताते थे कि वे उसके घर के बाहर स्थित पीपल के पेड़ के नीचे दबे हुए हैं और उन्हें बाहर निकाला जाए। युवक ने कहा कि शुरुआत में उसने इन सपनों को नजरअंदाज किया, लेकिन सपने लगातार आने लगे, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हो गया।

घर लौटकर बताई सपनों की बात

लगातार सपनों से परेशान होकर अमरपाल 7 जनवरी को इटावा से अपने गांव लौटा और उसने अपने परिवार को पूरी बात बताई। पहले तो परिजनों को यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब अमरपाल ने बार-बार आने वाले सपनों और उसमें बताए गए स्थान का जिक्र किया, तो परिवार ने ग्रामीणों से चर्चा की। इसके बाद गांव के कुछ बुजुर्गों और परिजनों की मौजूदगी में पीपल के पेड़ के नीचे खुदाई करने का निर्णय लिया गया।

डेढ़ फीट खुदाई के बाद मिली मूर्ति

बुधवार सुबह गांव वालों ने पीपल के पेड़ के नीचे खुदाई शुरू की। बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ फीट खुदाई करने के बाद वहां से एक ऐसी मूर्ति निकली, जिसे लोग खाटू श्याम की मूर्ति मान रहे हैं। मूर्ति निकलते ही मौके पर मौजूद लोगों ने जयकारे लगाने शुरू कर दिए। कुछ ही देर में यह खबर आसपास के गांवों तक फैल गई और मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई।

पीपल के पेड़ के नीचे ही की गई स्थापना

मूर्ति मिलने के बाद गांव वालों और परिजनों ने उसी स्थान पर, पीपल के पेड़ के नीचे मूर्ति को स्थापित कर दिया। वहां पूजा-पाठ शुरू हो गया और लोग फूल, प्रसाद और पैसे चढ़ाने लगे। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह स्थान अब एक पवित्र स्थल बन गया है और यहां आने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

प्रशासन को दी गई जानकारी

मामले की गंभीरता और भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दी गई। इस संबंध में हसनगंज की एसडीएम प्रज्ञा पांडे ने बताया कि उन्हें सूचना मिली है और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। प्रशासन यह जानने की कोशिश करेगा कि मूर्ति कितनी पुरानी है, वहां कैसे और कब दबी, और खुदाई के दौरान किसी नियम का उल्लंघन तो नहीं हुआ।

श्रद्धा या अंधविश्वास?

इस घटना को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। जहां एक ओर श्रद्धालु इसे खाटू श्याम का चमत्कार मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे अंधविश्वास से जोड़कर देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग प्रशासन से वैज्ञानिक जांच की मांग कर रहे हैं, तो कुछ इसे आस्था का विषय बताकर सवाल उठाने का विरोध कर रहे हैं।

जांच के बाद तय होगा आगे का रास्ता

फिलहाल मूर्ति पीपल के पेड़ के नीचे स्थापित है और श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह मामला धार्मिक चमत्कार है या किसी अन्य कारण से जुड़ा हुआ है। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने उन्नाव ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

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