Social Sharing icon

लखनऊ: उत्तर प्रदेश का गोरखपुर लम्बे समय तक दो ऐसी समस्याओं का प्रतीक रहा, जिन्होंने इस पूरे क्षेत्र को डर और बेबसी में जकड़ कर रखा था। “जापानी इन्सेफेलाइटिस और माफियाराज”। एक बीमारी शरीर को खोखला कर रही थी, दूसरी व्यवस्था और समाज को। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हालिया बयान, कि, “मच्छर और माफिया एक-दूसरे के पूरक हैं”, केवल एक टिप्पणी नहीं, बल्कि बीते 9 वर्षों में गोरखपुर में आए व्यापक और निर्णायक बदलाव का सार है। योगी सरकार के सतत प्रयासों से गोरखपुर आज न सिर्फ जापानी इन्सेफेलाइटिस के कहर से, बल्कि माफियाराज के ज़हर से भी मुक्त हो चुका है।

जेई पर हुआ निर्णायक प्रहार:
2017 से पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश दशकों तक जेई और एईएस की चपेट में रहा। सरकारी और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस त्रासदी की गंभीरता को साफ दर्शाते हैं। पहली बार ये बीमारी 1978 में सामने आई और उसके बाद हर साल इसका रूप भयावह होता गया। 1978 से लेकर वर्ष 2016 के बीच जेई व एईएस से 50,000 से अधिक बच्चों की मौत हुई, जिसका सबसे बड़ा कारण था, पूर्व की सरकारों की उपेक्षा। केवल गोरखपुर की बात करें तो यहां के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हर साल 1,200 से 1,500 मरीज भर्ती होते थे। वर्ष 2016 में जेई/एईएस से 600 से भी अधिक मौतें हुईं लेकिन फिर भी सरकारों का ध्यान इस ओर नहीं गया।


वर्ष 2017 में यूपी में योगी सरकार के आने के बाद मिशन मोड में इस मामले में हस्तक्षेप शुरू हुआ। ‘दस्तक अभियान’ के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर पहुंचे। लोगों को जागरूक किया गया, 90% से अधिक बच्चों का टीकाकरण किया गया। मच्छर नियंत्रण, जलभराव रोकथाम और स्वच्छता पर निरंतर निगरानी की गई जिसके परिणाम इस तरह सामने आए कि जेई से होने वाली मौतों में 95% से अधिक की कमी आ गई। 2023–24 में गोरखपुर में जेई से कोई भी मौत नहीं हुई। योगी सरकार का ये प्रयास शून्य मृत्यु केवल स्वास्थ्य सुधार नहीं, बल्कि पीढ़ियों को सुरक्षित करने की रणनीति थी।

माफियाराज के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’
गोरखपुर कभी अपराध, अवैध कब्जों और गुंडा टैक्स के लिए जाना जाता था। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता बनाया। 2017 में सरकार बनने के बाद 3500 से अधिक माफियाओं और अपराधियों पर कार्रवाई करके उन्हें जड़ से खत्म किया गया। 14,000 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध सम्पत्तियां जब्त की गईं या ध्वस्त की गईं। नतीजतन हजारों एकड़ सरकारी भूमि अतिक्रमण से मुक्त हुई, जिसे आमजन कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा गोरखपुर में गुंडा टैक्स और रंगदारी लगभग समाप्त हुई है। संगठित अपराध की दर में लगातार गिरावट आई है। इन कार्रवाइयों ने सिर्फ अपराधियों को ही नहीं, बल्कि अपराध की मानसिकता को भी तोड़ा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *