संभल हिंसा का सच सामने आया: 15-20 पुलिसकर्मियों की फायरिंग, कोर्ट ने FIR के दिए आदेश संभल हिंसा से जुड़े बहुचर्चित गोलीकांड मामले में चंदौसी कोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तत्कालीन CO रहे ASP अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने और मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला उस युवक आलम से जुड़ा है, जिसे हिंसा के दौरान तीन गोलियां लगी थीं। कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
संभल हिंसा मामले में न्याय की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए चंदौसी कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तत्कालीन CO और वर्तमान में ASP पद पर तैनात अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश संभल में हुई हिंसा के दौरान फायरिंग में घायल हुए युवक आलम के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
मामला संभल हिंसा के दिन का है, जब इलाके में तनाव और उपद्रव की स्थिति बनी हुई थी। आरोप है कि उस समय संभल के CO रहे अनुज चौधरी और इंस्पेक्टर अनुज कुमार तोमर समेत 15 से 20 पुलिसकर्मियों ने गोली चलाई थी। इस फायरिंग में आलम नाम के युवक को तीन गोलियां लगी थीं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद आलम को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन परिवार का आरोप है कि इलाज में देरी, भय और प्रशासनिक दबाव के चलते उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इन्हीं आरोपों को लेकर आलम के पिता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने क्या कहा?
चंदौसी कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला जांच के योग्य है। कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि 12 पुलिसकर्मियों, जिनमें तत्कालीन CO अनुज चौधरी का नाम भी शामिल है, के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और 7 दिनों के भीतर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कानून के दायरे में रहते हुए ही पुलिस को कार्रवाई करनी होती है और अगर इस दायरे का उल्लंघन हुआ है, तो जांच जरूरी है।
किन-किन नामों का है जिक्र?
इस मामले में तत्कालीन CO अनुज कुमार चौधरी के अलावा उस समय के इंस्पेक्टर अनुज कुमार तोमर का नाम भी प्रार्थी की ओर से कोर्ट में लिया गया है। इसके साथ ही कुल 12 पुलिसकर्मियों को इस मामले में आरोपी बनाए जाने का आदेश दिया गया है।
फायरिंग पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्थिति इतनी गंभीर थी कि पुलिस को गोलियां चलानी पड़ीं? और अगर फायरिंग की गई, तो क्या नियमों और SOP का पालन किया गया? आलम को तीन गोलियां लगना इस बात की ओर इशारा करता है कि फायरिंग बेहद नजदीक और गंभीर थी। याचिकाकर्ता का दावा है कि पुलिस द्वारा की गई फायरिंग गैर-जरूरी थी और सीधे तौर पर जानलेवा साबित हो सकती थी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
इस पूरे मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान बर्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ऐतिहासिक फैसला बताया।
उन्होंने लिखा, “कानून से ऊपर कोई नहीं — न वर्दी, न ओहदा। संभल हिंसा के दौरान एक युवक को गोली मारने के मामले में तत्कालीन CO समेत 12 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का CJM कोर्ट का आदेश एक ऐतिहासिक फैसला है।”
उन्होंने आगे कहा कि जिन अधिकारियों ने कानून की सीमाएं लांघी हैं, उन्हें न्यायपालिका के जरिए सजा जरूर मिलेगी।
पुलिस प्रशासन पर बढ़ा दबाव
कोर्ट के इस आदेश के बाद पुलिस प्रशासन पर भारी दबाव बन गया है। एक ओर जहां पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर पुलिस विभाग की भूमिका और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।