कुशीनगर में पुलिस महकमे की साख पर बड़ा दाग लगा है। जिन कंधों पर कानून की रक्षा की जिम्मेदारी थी, वही खाकीधारी गांजा तस्करी का संगठित नेटवर्क चला रहे थे। सरकारी गाड़ियों के सहारे यूपी से बिहार तक नशे की सप्लाई हो रही थी। एक झूठी लूट की कहानी ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया।
झूठी लूट की कहानी से खुला तस्करी का राज
कुशीनगर में 20 मार्च को एक कॉल ने पुलिस को चौंका दिया। सुंदर लाल निषाद नाम के व्यक्ति ने डायल-112 पर 3 लाख 5 हजार रुपये लूटे जाने की सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई, लेकिन जांच के दौरान कहानी में कई छेद नजर आने लगे। रामकोला थाना प्रभारी निरीक्षक धनवीर सिंह ने जब सुंदर लाल से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसके बयान बार-बार बदलते रहे। शक गहराया तो पुलिस ने उसका मोबाइल जब्त कर लिया। यहीं से कहानी ने बड़ा मोड़ लिया और एक झूठी लूट की स्क्रिप्ट से असली तस्करी का काला सच सामने आ गया।
मोबाइल डेटा से खुला ‘खाकी सिंडिकेट’, डिलीट फाइलों ने उगला सच
सुंदर लाल का मोबाइल फ्लाइट मोड पर था और डेटा डिलीट किया जा चुका था, लेकिन पुलिस ने तकनीक का सहारा लिया। रिकवरी ऐप के जरिए डिलीट की गई फाइलें वापस निकाली गईं। मोबाइल से गांजे की बोरियों और नकदी की गड्डियों की तस्वीरें मिलीं, जिसने पुलिस को चौंका दिया। इसके बाद जब सख्ती से पूछताछ हुई, तो सुंदर लाल टूट गया और उसने पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया। यहीं से यह साफ हो गया कि मामला सिर्फ लूट का नहीं, बल्कि एक संगठित ड्रग्स सिंडिकेट का है, जिसमें खाकीधारी भी शामिल हैं।
चार सिपाही ही निकले मास्टरमाइंड, वर्दी में चल रहा था खेल
जांच में सामने आया कि कुशीनगर पुलिस के चार सिपाही—सूरज गिरी, विनोद गुप्ता, जितेंद्र पाल और नितेश यादव—इस पूरे तस्करी नेटवर्क के मास्टरमाइंड हैं। आरोप है कि ये सिपाही ओडिशा से गांजे की बड़ी खेप मंगवाते थे और सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल कर उसे बिना किसी जांच के यूपी और बिहार के अलग-अलग इलाकों में पहुंचाते थे। वर्दी की आड़ में चल रहे इस धंधे ने पूरे पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी गाड़ी बनी ‘सेफ रूट’, यूपी से बिहार तक फैला नेटवर्क
तस्करी का यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल होने के कारण रास्ते में कोई जांच नहीं होती थी, जिससे गांजे की खेप आसानी से एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंच जाती थी। यूपी से बिहार तक इस नेटवर्क की सप्लाई चेन बनी हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, इस गिरोह ने लंबे समय से इस रूट पर अपना दबदबा बना रखा था और हर खेप में मोटी कमाई की जा रही थी। यह खुलासा दिखाता है कि कैसे सिस्टम के भीतर रहकर ही सिस्टम का दुरुपयोग किया जा रहा था।
21 किलो गांजा बरामद, 12 आरोपियों पर NDPS एक्ट में केस
पुलिस ने छापेमारी के दौरान 21 किलो 100 ग्राम गांजा, 73 हजार रुपये नकद और एक अपाचे बाइक बरामद की। मौके से सुरेश यादव को गिरफ्तार किया गया, जिसे इस गिरोह का अहम सदस्य बताया जा रहा है। इस मामले में कुल 12 आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, ताकि इस सिंडिकेट के बाकी सदस्यों तक भी पहुंचा जा सके।
दो सिपाही और एक तस्कर जेल में, विभाग की साख पर बड़ा सवाल
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पुलिस विभाग की साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिस विभाग को अपराध रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसी के कुछ कर्मियों का अपराध में शामिल होना बेहद गंभीर मामला है। रामकोला थाना प्रभारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और फिलहाल दो सिपाहियों के साथ एक तस्कर को जेल भेज दिया गया है। अब जांच का दायरा और बढ़ाया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था। यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।