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बरेली के विशारतगंज थाना क्षेत्र के मोहम्मद गंज गांव में सामूहिक नमाज को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पलायन की चेतावनी में बदल गया है। करीब 200 हिंदू परिवारों ने अपने घरों के बाहर ‘मकान बिकाऊ है’ लिखकर प्रशासन के प्रति रोष जाहिर किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर जुम्मे को घरों में सामूहिक नमाज अदा की जा रही है, शिकायत के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही और विरोध करने पर उन्हें ही दबाया जा रहा है। गांव में पुलिस बल तैनात है, लेकिन माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है।

मोहम्मद गंज में फिर गरमाया नमाज का मुद्दा

विशारतगंज थाना क्षेत्र के मोहम्मद गंज गांव में सामूहिक नमाज को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बार फिर उफान पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में मस्जिद नहीं है, इसलिए पहले मुस्लिम समुदाय के लोग पड़ोसी गांव में जुम्मे की नमाज पढ़ने जाते थे। लेकिन अब हर शुक्रवार अलग-अलग घरों की छतों या कमरों में सामूहिक रूप से नमाज अदा की जा रही है। बीते जुम्मे को भी कथित तौर पर एक घर में नमाज पढ़े जाने का वीडियो बनाकर पुलिस को सौंपा गया। आरोप है कि शिकायत के बाद भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। यही नहीं, ग्रामीणों का कहना है कि विरोध करने पर पुलिस ने उन्हें ही सख्त लहजे में समझाया और चुप रहने को कहा।

‘मकान बिकाऊ है’ बना विरोध का प्रतीक

तनाव बढ़ने के बाद लगभग 200 हिंदू परिवारों ने अपने घरों के बाहर ‘यह मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर चस्पा कर दिए। कुछ ने तो दरवाजों पर पेंट से भी यह लिख दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन स्थिति को नियंत्रित नहीं करता, तो वे गांव छोड़ने को मजबूर होंगे। यह कदम प्रतीकात्मक विरोध के रूप में उठाया गया है, लेकिन इसके पीछे गहरी नाराजगी और असुरक्षा की भावना झलक रही है। गांव की एक महिला ने आरोप लगाया कि रविवार रात गांव में फायरिंग भी हुई, जिससे बच्चों और महिलाओं में भय का माहौल है। हालांकि पुलिस ने फायरिंग की पुष्टि नहीं की है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि गोलियों की आवाज ने दहशत को और बढ़ा दिया।

जनवरी में भी हुआ था बड़ा विवाद

यह पहली बार नहीं है जब मोहम्मद गंज गांव नमाज को लेकर सुर्खियों में आया हो। 16 जनवरी 2026 को भी घर के भीतर सामूहिक नमाज पढ़ने का मामला सामने आया था। उस समय पुलिस ने 12 लोगों को हिरासत में लेकर चालान किया था। बाद में वे जमानत पर रिहा हो गए थे। उस कार्रवाई के बाद लगा था कि मामला शांत हो गया है, लेकिन करीब एक महीने बाद फिर वैसा ही घटनाक्रम सामने आने से विवाद दोबारा भड़क गया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर उस समय सख्ती होती, तो आज हालात यहां तक नहीं पहुंचते।

कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

गांव के लोगों का आरोप है कि सामूहिक नमाज के नाम पर कानून की अनदेखी हो रही है। उनका कहना है कि अगर निजी घरों में नियमित रूप से बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं, तो प्रशासन को इसकी अनुमति और वैधानिक पहलुओं की जांच करनी चाहिए। वहीं पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। मौके पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हालात पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का दावा है कि शांति और सौहार्द बनाए रखना प्राथमिकता है, लेकिन ग्रामीणों का सवाल है कि क्या सिर्फ तैनाती से समस्या हल हो जाएगी?

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि घरों में सामूहिक नमाज पर रोक नहीं लगी और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए, तो 200 परिवार पलायन के लिए मजबूर होंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि पूरे जिले की कानून-व्यवस्था और सामाजिक सामंजस्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस संकट का स्थायी समाधान कैसे निकालता है—क्या सख्ती होगी, संवाद होगा या मोहम्मद गंज से 200 परिवारों का पलायन हकीकत बन जाएगा?

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