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उत्तर प्रदेश के चंदौली में शराब माफियाओं के खिलाफ ऐसा प्रहार हुआ है, जिसने पूरे नेटवर्क की जड़ें हिला दी हैं। महज 15 दिनों में 428 करोड़ रुपये की अवैध शराब की बरामदगी ने न सिर्फ पुलिस की रणनीति को चर्चा में ला दिया है, बल्कि बिहार की शराबबंदी में भी इस कार्रवाई की बड़ी भूमिका सामने आई है। इस पूरे ऑपरेशन के केंद्र में हैं—एसपी संदीप लांघे, जिनका ‘नो टॉलरेंस’ एक्शन अब तस्करों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है।

‘15 दिन में 428 करोड़’… ऑपरेशन जिसने हिला दिया नेटवर्क

चंदौली पुलिस ने मार्च महीने के महज 15 दिनों में जो कार्रवाई की, उसने अवैध शराब तस्करी के पूरे तंत्र को झकझोर कर रख दिया। लगातार छापेमारी, हाईवे चेकिंग और खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस ने 428 करोड़ रुपये मूल्य की शराब जब्त कर ली। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उस संगठित नेटवर्क पर करारा वार है जो लंबे समय से बिहार की शराबबंदी का फायदा उठाकर काला कारोबार चला रहा था। एसपी संदीप लांघे के नेतृत्व में चल रहे इस ‘ऑपरेशन क्लीन’ ने साबित कर दिया कि अगर रणनीति मजबूत हो तो बड़े से बड़ा नेटवर्क भी धराशायी किया जा सकता है।

आलू, कागज और पुट्ठे में छिपी साजिश… ऐसे खुला राज

तस्करों की चालाकी भी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं थी। शराब की खेप को कभी आलू की बोरियों के नीचे, तो कभी कागज और पुट्ठे की गट्ठरों के नीचे छिपाकर बिहार भेजा जा रहा था। 2 मार्च को 1028 पेटी शराब ट्रक से बरामद हुई, जिसकी कीमत करीब 1.68 करोड़ रुपये थी। इसके बाद 9 मार्च को 849 पेटी और 14 मार्च को 710 पेटी शराब पकड़ी गई। हर बार तस्करों ने नए तरीके अपनाए, लेकिन पुलिस की निगरानी और टेक्नोलॉजी आधारित ट्रैकिंग के आगे उनकी हर चाल नाकाम साबित हुई। यह कार्रवाई बताती है कि अब तस्करों के लिए कोई भी रास्ता सुरक्षित नहीं बचा है।

SWAT और सर्विलांस टीम का ‘साइलेंट स्ट्राइक’

इस पूरे ऑपरेशन में चंदौली पुलिस की स्वाट और सर्विलांस टीम ने ‘साइलेंट स्ट्राइक’ की भूमिका निभाई। बिना शोर-शराबे के खुफिया जानकारी जुटाना, संदिग्ध वाहनों की पहचान करना और सही समय पर कार्रवाई करना—इन टीमों की खासियत रही। एसपी संदीप लांघे ने टीम के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए 50 हजार रुपये का नकद इनाम देकर उनका हौसला बढ़ाया। यह इनाम सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि पुलिस टीम के लिए एक संदेश भी है कि मेहनत और ईमानदारी का परिणाम हमेशा सामने आता है।

कौन हैं SP संदीप लांघे? ‘शांत चेहरा, सख्त रणनीति’

2016 बैच के आईपीएस अधिकारी संदीप लांघे मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं और जून 2024 में उन्होंने चंदौली के एसपी के रूप में कार्यभार संभाला। उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी खासियत है—कठोर अनुशासन और लगातार मॉनिटरिंग। उन्होंने पुलिस विभाग में ट्रांसफर नीति को सख्ती से लागू किया, जिससे किसी भी कर्मी को एक जगह जड़ें जमाने का मौका नहीं मिला। IGRS निस्तारण में राज्य में शीर्ष स्थान हासिल करना और जनता की शिकायतों का मौके पर समाधान करना उनके काम करने के तरीके को दर्शाता है। शांत स्वभाव के बावजूद उनकी रणनीति बेहद आक्रामक और परिणाम देने वाली मानी जाती है।

बिहार कनेक्शन और चंदौली रूट… क्यों है इतना अहम

चंदौली का भौगोलिक स्थान इसे तस्करों के लिए बेहद अहम बना देता है, क्योंकि यह बिहार की सीमा से सटा हुआ है, जहां पूर्ण शराबबंदी लागू है। इसी कारण तस्कर यहां से शराब की बड़ी खेप बिहार में सप्लाई करने की कोशिश करते हैं। लेकिन अब एसपी लांघे की ‘हर सूचना पर एक्शन’ नीति ने इस रूट को तस्करों के लिए खतरनाक बना दिया है। लगातार गिरफ्तारी और नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस अब सिर्फ खेप पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि माफिया सरगनाओं तक पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और बड़े खुलासे कर सकती है।

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