कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद के कथित निर्माण को लेकर देशभर में छिड़ी बहस अब और तेज हो गई है। इस विवाद पर पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। संघ प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह निर्माण न तो मुसलमानों के हित में है और न ही हिंदुओं के, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक मंशा दिखाई देती है।
दरअसल, मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में बाबरी मस्जिद के नाम से मस्जिद की आधारशिला तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा रखे जाने के बाद यह मामला तूल पकड़ चुका है। इस घटनाक्रम को लेकर पहले ही राज्य और केंद्र की राजनीति गरमा चुकी थी, अब RSS प्रमुख की टिप्पणी ने विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर और धार दे दी है।
मोहन भागवत ने कहा कि बाबरी मस्जिद के नाम पर दोबारा विवाद खड़ा करना एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है। उन्होंने साफ कहा कि यह सब वोटों की राजनीति के तहत किया जा रहा है। संघ प्रमुख के मुताबिक, इस तरह के कदम समाज में तनाव और विभाजन को बढ़ावा देते हैं, जो किसी भी समुदाय के हित में नहीं हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसे प्रयास नहीं होने चाहिए।
जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या सरकार को धार्मिक स्थल बनवाने चाहिए, तो मोहन भागवत ने एक अहम संवैधानिक और ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार को मंदिर, मस्जिद या किसी भी धार्मिक स्थल के निर्माण में सीधे तौर पर शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने सोमनाथ मंदिर और राम मंदिर का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि इन दोनों मामलों में सरकारी पैसे का इस्तेमाल नहीं हुआ था। राम मंदिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रस्ट के माध्यम से बना, जिसमें जनता ने योगदान दिया।
इस पूरे मुद्दे पर पश्चिम बंगाल में विपक्ष भी आक्रामक नजर आ रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने इस निर्माण को संघर्ष भड़काने का प्रयास बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस समाज में तनाव पैदा कर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।
बंगाल में बाबरी मस्जिद के नाम पर उठे इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है? मोहन भागवत के बयान के बाद यह साफ है कि RSS इस पूरे घटनाक्रम को सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा मानता है।
फिलहाल, बेलडांगा बाबरी मस्जिद मामला केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति, धर्म और संविधान की सीमाओं से जुड़ा एक संवेदनशील विषय बन चुका है, जिस पर आने वाले दिनों में बयानबाज़ी और तेज़ होने के आसार हैं।